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हमारी अपनी खुद पर कविता | Poem on Myself

हमारी अपनी खुद पर कविता | Poem on Myself

माँ की कविता

मैने अपनी खुद की कविता अपने भावो से प्रकट की है । मेरा जन्म 1980  मे हुआ था । अल्मोड़ा से संस्कृत की शिक्षा प्राप्त की और वही रहकर मैने अपनी कविता लिखी ।  मुझको उम्मीद है की आप लोगो इसको पसंद करेंगे। इस कविता मे मैने खुद अपनी कविता लिखी यह कविता किसी भी मित्र, सदस्य, पड़ौसी या उसके विचारों का अध्ययन नहीं है।

कविता शीर्षक (Poem Title) : मेरी माँ अगर तुम इस दुनिया मे नहीं होती तो

मेरी माँ अगर तुम इस दुनिया मे नहीं होती तो

मैंभी नहीं होता मेरी देखभाल कौन करता

मेरी माँ अगर तुम इस दुनिया मे नहीं होती तो

मुझे रात मे कौन गाना कौन सुनाता

मेरी माँ अगर तुम इस दुनिया मे नहीं होती तो

पता नहीं मैं बड़ा कैसे होता

मेरी माँ अगर तुम इस दुनिया मे नहीं होती तो

मुझको खाना पीना कैसे सीख पाता

मेरी माँ अगर तुम इस दुनिया मे नहीं होती तो

मुझे सही गलत का कैसे पता चलता

मेरी माँ अगर तुम इस दुनिया मे नहीं होती तो

मुझे संसार मे कौन जीना सीखाता

मेरी माँ अगर तुम इस दुनिया मे नहीं होती तो

मे माँ किस को बोल पाता

मैं अपनी माँ के बिना नहीं रह सकता

माँ के बिना जीवन अधूरा है

मेरी माँ अगर तुम इस दुनिया मे नहीं होती तो………

 ————- ममता

 

कविता शीर्षक (Poem Title) : मेरी अपनी  ख्वाहिशें

जब मे आसमान की बुलंदियों तक चला जाऊंगा

वहाँ से अक्सर  देखा करुंगा फिर तुम छोटे दिखोगे दोस्त और

कोशिश करूँगा मे तुम को अपने साथ ले जाने की

मिलने वाला आते है और मिलकर चले जाते है ।

 

जी चाहता है की मे अपने दिल तुमको दू

परन्तु दुनिया इतनी जालिम है की किसी को देख

लो तो बोलती है दिल दिया है जान भी देंगे

और बोलो तुमको क्या चाहिए ।

———–अर्चना

कविता शीर्षक (Poem Title) : बुलंद हौसले

इश्क़ मे तो आदमी बर्बाद हो जाता है

दुनिया पीछा पड़ जाती है ग़ालिब

और कोई साथ नहीं देता और माता – पिता

बोलते है की वो अनजान थी और बोलते है की

कौन हूँ तू ?” बस यही सवाल होता है,

जब कोई जबाव  नहीं दी पाते तो दिल जाने क्यूँ,

गुव्हा देता है की सब यूँ ही बेकरार है,

और अपने दिल भी हार मान लेता है ।

 

शादी समाज की परम्परा होती है

और मौत इंसान की काली सच्ची घटना होती है

तोड़ के अपने समाज की परम्परा को मे अपनी

अलग पहचान बनाऊँ की समाज के लोगो मे  इतना दम नहीं की

समाज की खोखली परम्परा को तोड से कोई रोक सके ।

जिससे समाज की बेकर परम्परा किसी का भी कुछ

भी बिगाड़ नहीं कर पाए ।  जिससे लोगो के हौंसलों बुलन्द हो ।

 

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